अब छोड़ो सारे रास रंग,
कर डालो अपनी निद्रा भंग।
हर हर महादेव जयकार करो,
अब भिषण युद्ध हुंकार भरो।
यदि शत्रु एक चिंगारी है,
तो तू ज्वाला भयकारी है।
। शत्रु को दे तू ऐसा दण्ड,
हो जाए शोर्य उसका विखण्ड।
तू लाल नहीं अब ढाल बन,
हर शत्रु का तू काल बन।
रण चंडी जिसकी प्राण हो,
ऐसा योद्धा विकराल बन।
अपनी शक्ति संचार कर,
सर्वस्व सामर्थ्य विस्तार कर।
शत्रु का अस्तित्व मिटाना है,
अब द्वंद नहीं संहार कर।
जब तेरे शस्त्र मुख खोलेंगे,
शत्रु के पग फिर डोलेंगे।
रणकैशल होगा क्षिन्न भिन्न,
फिर त्राही त्राही ये बोलेंगे।
रणगर्जन का इसे चाह है,
तेरे भू की भूख अथाह है।
हर कृत कायरता पूर्ण इसका,
फिर भी मिथ्या उत्साह है।
।
No comments:
Post a Comment