Monday, November 23, 2020

Dioda Solutions: Naga Sadhus and 13 Akhadas

Dioda Solutions: Naga Sadhus and 13 Akhadas:   What encounters your mind when you hear the word Naga or Naga Sadhu. Most of us will reply by the most obvious answers like "not muc...

Sunday, August 25, 2019

प्रेम प्रसंग

प्रेम एक राग है या कोई रंग है,
या डस गया जो हर किसी को ये कोई भुजंग है।
कोई कहता मृदंग है कोई कहता निषंग है
पर हर हृदय की हर गली में चलता प्रेम का प्रसंग है।

कहीं ये आश तो कहीं विश्वास है,
कहीं उपवास तो कहीं मधुमास है।
कहीं विलयन तो कहीं मिलाप प्रेम वो तरंग है,
पर हर हृदय की हर गली में चलता प्रेम का प्रसंग है।

कभी ये सुख का सागर कभी अंधकार है,
कभी ये रक्षा कवच तो कभी प्रहार है।
कभी ये मोह बंधन तो कभी मलंग है,
पर हर हृदय की हर गली में चलता प्रेम का प्रसंग है।

कोई इसे सर्वस्व कहता कोई कहता निराधार है,
कोई इसे कलंक कहता कोई कहता श्रिंगार है।
कोई कहता उन्माद है कोई कहता उमंग है,
पर हर हृदय की हर गली में चलता प्रेम का प्रसंग है।

क्या ये प्रेम एक रोग है?
क्या ये भोग है या कोई योग है?
करता इसके दोहरे चरित्र से न हर कोई दंग हैं?
पर हर हृदय की हर गली में चलता प्रेम का प्रसंग है।

ये हैं मन का प्रबल प्रवाह या शितल हिम सघन है?
विस्मृत करता है पल पल जो माया है या चेतन है?
कभी है सिंधु का ज्वार भाट कभी है स्थिर पर्वत समान।
क्या बनता ये सप्तरंग सुमन या बनता है सकरुण अवसान ?

Saturday, March 2, 2019

रणगर्जन

अब छोड़ो सारे रास रंग, 
कर डालो अपनी निद्रा भंग।
हर हर महादेव जयकार करो,
अब भिषण युद्ध हुंकार भरो।

                                 यदि शत्रु एक चिंगारी है, 
                                 तो तू ज्वाला भयकारी है।
               ‌‌‌          ‌।       शत्रु को दे तू ऐसा दण्ड,
                                  हो जाए शोर्य उसका विखण्ड। 

तू लाल नहीं अब ढाल बन,
हर शत्रु का तू काल बन।
रण चंडी जिसकी प्राण हो,
ऐसा योद्धा विकराल बन।

                   ‌‌‌                 अपनी शक्ति संचार कर,
                                    सर्वस्व सामर्थ्य विस्तार कर।
                                    शत्रु का अस्तित्व मिटाना है,
                                    अब द्वंद नहीं संहार कर।

जब तेरे शस्त्र मुख खोलेंगे,
शत्रु के पग फिर डोलेंगे।
रणकैशल होगा क्षिन्न भिन्न,
फिर त्राही त्राही ये बोलेंगे।
                                
                                      रणगर्जन का इसे चाह है,
                                     तेरे भू की भूख अथाह है।
                                     हर कृत कायरता पूर्ण इसका,
                                      फिर भी मिथ्या उत्साह है।


                                       


   

                                       

                                     
            ‌‌‌                        
                             ‌।